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COMMENTARY
 

देश आर्थिक गुलामी की ओर

May 17,2017 12-17-2017 09:18pm


अरुण सिंह
 जिस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम पर अंग्रेजों ने देश को कब्जाया था वो तस्वीर फिर सामने आने जा रही है,उसी बाजार के नाम पर। कारण सोना हमारे लिए हमेशा से सोणा रहा है। केवल गहने बनवाने के लिए नहीं बल्कि निवेश के लिए, फ्यूचर या जरूरत के वक्त काम आने के लिए हम सोना खरीदते हैं। हकीकत यही है कि सोने के  प्रति यही हमारी दीवानगी हमारे देश को आर्थिक गुलामी की ओर ढकेल रही है। 
दरअसल देश में पिछले 10 साल में विदेशी संस्थागत निवेश के जरिए 303 अरब डॉलर का निवेश हुआ जबकि इन 10 साल में हमनें 270 अरब डॉलर का सोना खरीदा है। यानी एफआईआई ने हमारी कंपनियों के शेयर खरीदे और हमने तकरीबन उतने ही पैसे का सोना खरीद लिया। ये ठीक ऐसा ही है जैसे आप अपनी दुकान या कंपनी का एक हिस्सा बेच दें और उस पैसे से गहने बनवाकर तिजोरी में रख लें।देश में एफआईआई यानी विदेशी संस्थागत निवेश को 1994 में मंजूरी मिली थी। तब से अब तक यानी पिछले 22 साल में टॉप कंपनियों में विदेशी संस्थागत निवेश की 25 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी हो गई है। फिलहाल देश की टॉप 200 कंपनियों में 34 फीसदी हिस्सेदारी विदेशी हाथों में है। यानी हम अपनी कंपनियां विदेशियों को सौंप रहे हैं और उसके बदले में खरीद रहे हैं तिजोरियों में पड़ा रहने वाला सोना। ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही इन कंपनियों में 51 फीसदी हिस्सेदारी विदेशियों की हो जाएगी और देश  की आर्थिक आजादी छिन जाएगी।
कितना सोना है हमारे पास
0 सरकार ने रिजर्व बैंक में 557 टन सोना रिजर्व में रखा है।
0 बाकी जनता व मंदिरों के पास जमा है 22 हजार टन।
0 ताजा रेट के हिसाब से तकरीबन 65 लाख करोड़ का। 
0 हर साल हम खरीदते हैं एक हजार टन खरा सोना।
0 शिरडी के साईंबाबा मंदिर के पास है 220 किलो।
0 सोमनाथ मंदिर के पास है 35 किलो से ज्यादा ।
सोचिए अगर हमारे  पास सोने के रूप में रखे करीब 65 लाख करोड़ रुपये सोने में निवेश की बजाय अस्पतालों और स्कूलों में लगते तो देश की जीडीपी बढ़ती। देश तरक्की करता। हर कोई अमीर होता। मोदी सरकार ने सरकारी स्तर पर जो गोल्ड स्कीम निकाली थी अगर उसे अच्छी तरह से लोग लेते तो यकीनन वो फेल नहीं होती। गोल्ड दो-ब्याज लो, वो गोल्ड देश हित में काम आता पर कोई गोल्ड निकालने को तैयार नही। वैसे ही हम महिलाओं से गोल्ड नहीं निकलवा सकते। निकलवाया तो खैर नहीं।
हजार टन सोना हो तो क्या हो?
0 30 हजार के हिसाब से कम से कम तीन लाख करोड़ रुपए।
0 आयात बिल घटेगा,सोना आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
0 सरकार तीन साल तक हर किसी को दे सकती है खाना।
0 रिजर्व बैंक अमीरों की सूची में होगा, देश मजबूत होगा।
कितना सोना है रिजर्व बैंक में 
0 सोचिए कितना सोना होगा हमारे देश के सरकारी खजाने में।
0 फरवरी तक की रिपोर्ट- रिजर्व बैंक में 557 टन सोना।
0 यानी अगर आप इसे ट्रकों में लादें तो 62 ट्रक सोने केहोंगे।
0 औसतन एक ट्रक में नौ टन सामान लादा जा सकता है।
0 देश के घरों-मंदिरों में इससे कई गुणा ज्यादा सोना पड़ा है।

देश तक रखते हैं सोना गिरवी:  केवल आम आदमी ही जरूरत के वक्त सोना गिरवी नहीं रखता बल्कि देश तक रखते हैं। दरअसल पिछली सदी तक कई देशों में सोना मुद्रा की तरह इस्तेमाल किया गया है। इसके बाद फिर गोल्ड बैक्ड करेंसी आई।  इस नीति के तहत कोई  देश रिजर्व सोने के बराबर ही मुद्रा छाप सकता है।  1946 में ब्रेटन वुड्स सिस्टम के तहत इसे अस्तित्व में लाया गया।  40 साल पहले गोल्ड स्टैंडर्ड सिस्टम खत्म हो गया। वैसे आर्थिक संकट के समय अधिकतर देश केंद्रीय बैंक में रिजर्व सोना को ही कैश कराते हैं। मसलन आर्थिक संकट की स्थिति में तत्कालीन चंद्रेशखर सरकार ने रिजर्व सोने को कैश कराया था। उस वक्त चंद्रशेखर सरकार ने मुद्रा संतुलन संकट से निपटने के लिए करीब 65 टन सोना बैंक आॅफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (बीआईएस) के यहां गिरवी रखा था। वैसे जब कोई देश संतुलन संकट से निपटने के लिए सोना गिरवी रखता है तो पूरी दुनिया में इसका असर पड़ता है। विश्व युद्ध के दौरान कई यूरोपीय देशों ने अपना गोल्ड रिजर्व बैंक आॅफ इंग्लैंड और अमेरिकी फेडरल रिजर्व बोर्ड के पास जमा किया था। परंपरागत तौर पर रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) अपना सोना तिजोरियों में रखता है।  2009 में रिजर्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से डीमैट फॉर्म में गोल्ड खरीदा था। 

किस मुल्क के पास कितना सोना (टॉप 10)
1. अमेरिका-- 8133.5 टन
2. जर्मनी-- 3381.3 टन
3. इटली-- 2451.8 टन
4. फ्रांस-- 2435.4 टन
5. चीन-- 1762.3 टन
6. स्विटजरलैंड-- 1040.1 टन
7.रूस        -981 टन
8. जापान-- 765.2 टन
9. नीदरलैंड्स-- 612.5 टन
10. इंडिया-- 557.7 टन
11. ताइवान-- 423.6 टन
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