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COMMENTARY

कुटिल रणनीति

May 17,2017 08.29

सैयद अता हसनैन
लेफ्टिनेंट उमर फैयाज अनंतनाग के स्कूल से निकले थे और दिसंबर 2012 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में शामिल हुए। Read More

एसेंबली चुनाव मोड में यूपी

March 03,2016 17:56:47 PM

सपा, बसपा व बीजेपी की नाक का सवाल, जदयू, रालोद, जदएस, कांग्रेस, राजद समेत कई छोटे दलों का बनेगा महागठबंधन,सपा के लिए सत्ताजनित नाराजगी तो मायावती के फेवर में उनका कड़क मिजाज, तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई है बीजेपी

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शेम-शेम: फर्जी थी खली की फाइट

March 03,2016 18:02:30 PM

रेसलर कृष्ण कुमार ने दी दो-दो हाथ करने की चुनौती-कानूनन डेथ वारंट पर देश में कोई साइन नहीं कर सकता, ब्लड केप्सूल से जनता को बेवकूफ बनाया, खली ने कहा-सब मेरी लोकप्रियता से जलते हैं, जब तक शरीर में दम है लड़ता रहूंगा-मनीष कुमार
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करना क्या है

January 05,2016 09:56:23 AM

इरशाद कामिल0 कितनी बढ़िया बात है कि शायर दो लाइनों में कितनी बड़ी बात कर जाता है। सोचता था कि बड़ी बात करनी चाहिए और कम लफ्जों में करनी चाहिए। Read More

सम्मान का निरादर

October 20,2015 08:56:05 AM

शशि थरूर0साहित्यकारों द्वारा साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटाने से उपजा बनावटी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। Read More

शेखी गायब

August 08,2015 09:14:50 AM

शेखर गुप्ता0सांसदों को इतने अधिकार और संरक्षण इसीलिए दिए गए हैं कि वे पूरी स्वतंत्रता से बोल सकें और नागरिकों की तरफ से फैसलों पर असर डालें फिर चाहे वे अल्पमत में ही क्यों न हों। Read More

न्यूट्रिनो बहुत अहम

June 22,2015 09:30:59 AM

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम  0 ख्यात स्विस वैज्ञानिक वोल्फगांग पॉली ने 1930 में कहा था कि न्यूट्रिनो ब्रह्मांड में फोटॉन यानी प्रकाश कणों के बाद दूसरे सबसे ज्यादा पाए जाने वाले कण हैं। Read More

पानी की तलाश में

June 15,2015 11:34:35 AM

उपासना चौबे0किसी के दुख में भावनात्मक सहभागिता का संवेदन, समाधान कर पाने या न कर पाने की क्षमता से कतई संचालित नहीं होता Read More

सारी दाल ही काली

June 09,2015 14:28:38 PM


देशपाल सिंह पंवार0 बरसों पहले कोक आदि में मिलावट का हल्ला कटा था। जिसने किया वो आज देश का नामी चेहरा बन चुकी है। 5 साल में कोक अादि पर फिर मुंह क्यों नहीं खोला..
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गंदा है ये धंधा

May 22,2015 10:45:03 AM

मिथलेश पंवार0सत्य ही शिव है। शिव ही सुंदर है। सुंदर क्या है? वो जो आंखों को अच्छा लगे। दिल को अच्छा लगे। यदा-कदा कुछ पलों को अगर छोड़ दें तो नैतिक-अनैतिक अंतहीन सिलसिले के चलते रोजमर्रा की जरूरतें जिस तरह हमारी दिनचर्या का गला घोंट रही हैं,उसमें ना तो कुछ सुंदर होता दिख रहा है, ना ही दिल महसूस कर पा रहा है। Read More

 

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